﻿ज़बूर.
117.
ऐ तमाम अक़वाम, रब की तमजीद करो! ऐ तमाम उम्मतो, उस की मद्हसराई करो! 
क्योंकि उस की हम पर शफ़क़त अज़ीम है, और रब की वफ़ादारी अबदी है। रब की हम्द हो! 
